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5 ऐसे डॉक्टरों की कहानियां जो मुफ्त इलाज करके समाज में बदलाव ला रहे

5 ऐसे डॉक्टरों की कहानियां जो मुफ्त इलाज करके समाज में बदलाव ला रहे

डॉक्टर अब सिर्फ बीमारियों का इलाज ही नहीं कर रहे हैं बल्कि लोगों को आत्म निर्भर भी बना रहे हैं। देश के कुछ ऐसे डॉक्टर्स भी हैं जो समाज को स्वस्थ बनाने के साथ बदलाव भी ला रहे हैं। कल वर्ल्ड डॉक्टर्स डे है। भारत के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. विधान चन्द्र रॉय को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए हर एक जुलाई को चिकित्सक दिवस के रूप मनाया जाता है। इस मौके पर जानिए देश के 5 ऐसे डॉक्टर जो वाकई धरती पर भगवान का रूप साबित हो रहे हैं…

1- डॉ. योगी ऐरन

देहरादून के डॉ. योगी ऐरन एक प्लास्टिक सर्जन हैं और उम्र 80 साल है। डॉ. योगी का पूरा जीवन ऐेसे लोगों के लिए समर्पित रहा जो आग में झुलस चुके हैं या जंगली जानवर का शिकार बन चुके हैं।

ऐसे लोगों को बचाने के लिए वह सालभर में करीब 500 से अधिक सर्जरी निशुल्क करते हैं। इस मिशन में एक असिस्टेंट भी जो करीब 25 सालों से उनके साथ काम कर रहा है। इनका बेटा भी इस काम में उनकी मदद करता है।

अपनी क्लीनिक चलाने के अलावा डॉ. योगी अलग-अलग गांवों में जाकर साल में कई बार 15-15 दिन का कैंप लगाकर सर्जरी करते हैं। कैंप के लिए वे करीब 15 डॉक्टरों की टीम अमेरिका से भी बुलाते हैं और निशुल्क इलाज करते हैं।

कैंप के लिए ऐसे गांवों को चुनते हैं जहां आमतौर पर कोई सुविधाएं नहीं पहुंच पातीं। हिमालय के पिछड़े गांवों में करीब 10 हजार लोग अभी भी इलाज के लिए वेटिंग लिस्ट में हैं। कैंप के दौरान डॉक्टरों के साथ मिलकर करीब 10 सर्जरी रोजाना की जाती हैं। इसके अलावा डॉ. योगी साइंस पार्क का भी निर्माण करा रहे हैं।

2- डॉ. अभिजीत सोनवाणे

डॉ. अभिजीत सोनवाणे अक्सर पुणे में सड़क किनारे बैठे गरीब लोगों से उनका हाल पूछते देखे जाते हैं। 4 साल पहले इस्तीफा देकर उन्होंने सोहम ट्रस्ट की शुरुआत की। लक्ष्य था, ऐसे लोगों का निशुल्क इलाज करना जो बेहद गरीब हैं।

डॉ. अभिजीत के मुताबिक, निशुल्क इलाज की शुरुआत ऐसे लोगों से की जो सड़क किनारे रहते हैं और भीख मांगते हैं। उनकी मदद करना मेरे लिए कोई अभियान नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है जो मैं निभा रहा हूं।
शुरुआत ऐसे लोगों के इलाज से हुई लेकिन बाद में इन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कोशिश की। इस पहल का नाम रखा ‘बैगर टू आंत्रप्रेन्योर’। इसके तहत भिखारियों को पैसे कमाकर सम्मान से साथ जीना सिखाया गया।
डॉ. अभिजीत ने उन्हें नाई की दुकान खोलने, मंदिर के बाहर फूल बेचने, दीया बनाने जैसे काम शुरू करने में मदद की है। उनकी पहल का नतीजा है कि कभी भीख मांगने वाले 37 लोग अब पैसे कमा रहे हैं।

3- डॉ. मनोज दुरईराजडॉ.

मनोज दुरईराज कार्डियक सर्जन हैं और पुणे में इनका क्लीनिक हैं। वह मेरियन कार्डियक सेंटर और रिसर्च फाउंडेशन चला रहे हैं यहां ऐसे लोगों को निशुल्क इलाज किया जाता है जिनके हार्ट में डिफेक्ट है।

इसकी शुरुआत इनके पिता डॉ. मैनुअल दुरईराज ने की थी जो कार्डियोलॉजिस्ट थे जिन्होंने 2 दशक तक भारतीय आर्मी और तीन पूर्व राष्ट्रपति की देखभाल की। 1991 में डॉ. मनोज ने मेरियन कार्डियक सेंटर और रिसर्च फाउंडेशन से जुड़े और 2005 में दिल्ली एम्स से पढ़ाई पूरी के बाद पिता की विरासत को आगे बढ़ाया।

डॉ. मनोज अब तक 350 से अधिक निशुल्क हार्ट सर्जरी कर चुके हैं इनमें ज्यादातर बच्चे शामिल हैं जो जन्मजात दिल की बीमारी के साथ पैदा हुए थे।

डॉ. मनोज का कहना है पिता ऐसे लोगों की मदद करते थे जिनके पास इलाज के लिए पैसा नहीं और दूर-दराज इलाकों से आते थे। उनकी इस बात ने मुझे प्रेरित किया और मैं भी वही कर रहा हूं।
डॉ. मनोज आसपास के क्षेत्रों में जाकर उन लोगों का इलाज करते हैं जिनके पास महाराष्ट्र का बीपीएल कार्ड नहीं है। कार्डियक सेंटर में सिर्फ सर्जरी ही नहीं ऑपरेशन के बाद निशुल्क दवाइयों और देखरेख का भी ध्यान दिया जाता है।

4- डॉ. मनोज कुमार

ब्रिटेन में 15 साल काम कर केरल लौटे मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों का निशुल्क इलाज करना है।

केरल के रहने वाले डॉ. मनोज के मुताबिक, सरकार मानसिक रोगियों के लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया नहीं करा रही इसलिए मैं अपने राज्य के लोगों की मदद कर रहा हूं।

डॉ. मनोज ने केरल के कोझिकोड में 2008 में मेंटल हेल्थ एक्शन ट्रस्ट की स्थापना की। उनकी इस पहल में कई विशेषज्ञ और आम लोग भी वर्तमान में ट्रस्ट से करीब 1 हजार वॉलेंटियर जुड़े हैं। इनमें होममेकर, रिटायर्ड प्रोफेशनल और ऐसे लोग शामिल हैं जो दूसरों की मदद करने के लिए तत्पर रहते हैं।

बीमार होने पर परिजन सबसे इन्हीं वॉलेंटियर से संपर्क करते हैं। अधिक गंभीर स्थिति न होने पर टीम में मौजूद प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स इलाज करते हैं। केरल के मलप्पुरम, वायनाड, कोझिकोड, थ्रिसूर, अलेप्पी समेत केरल में ट्रस्ट के 25 सेंटर्स हैं। हर केंद्र की स्थापना गांव में ही की गई है।
केंद्रों में प्रशिक्षित सायकोलॉजिस्ट और सायकियाट्रिक सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो मरीजों की काउंसलिंग करने के साथ थैरेपी देते हैं।

लेकिन दवाएं देने का काम डॉ. मनोज कुमार करते हैं।
पेशेंट से दूर या इमरजेंसी की स्थिति में डॉ. मनोज कुमार वॉट्सएप, स्काइप और गूगल हैंगआउट की मदद से वीडियो कॉलिंग के जरिए जुड़ते हैं। उनकी स्थिति जानने के बाद थैरेपी दें या दवाएं, केंद्र के लोगों को निर्देश देते हैं।

5- डॉ. किरण मार्टिन

डॉ. किरण मार्टिन बाल रोग विशेषज्ञ हैं। दिल्ली की 60 स्लम कॉलोनियों के 5 लाख लोगों को सेवाएं दे रही हैं। इसकी शुरुआत 1988 में हुई थी, जब वह पहली बार साउथ दिल्ली के स्लम एरिया में कॉलरा फैलने के बाद पहुंचीं थी।

यहां के लोगों की मदद करने के लिए उन्होंने पेड़ के नीचे कुर्सी-मेज रखकर क्लीनिक शुरू की। आशा नाम का एक संगठन बनाया और महिलाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें कम्युनिटी हेल्थ वर्कर बनाया।

इन महिलाओं को प्रशिक्षित करने के बाद फर्स्ट-एड बॉक्स दिया ताकि वे बीमारी और संक्रमण को रोकने के लिए प्राथमिक उपचार कर सकें। यह टीम महिलाओं को पोषण, सेहत और कैसे बच्चों को बीमारियों से दूर रखें इसकी जानकारी देती है।

गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आशा कार्यकर्ता लैब भी संभाल रही हैं। यहां ईसीजी, एक्स-रे जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। लोगों को साफ पानी मिले इसके लिए डॉ. किरण ने कई जगह हैंडपंप भी लगवाए हैं।

गरीब लोगों के लिए फाइनेंस स्कीम की शुरुआत की है। जिसके मुताबिक, लोग खाता खुलवा सकते हैं और कर्ज भी ले सकते हैं। ये सुविधा झोपड़ियों में रहने वालों के बच्चों को शिक्षित करने और रोजगार शुरु करने में मदद कर रही है।

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Calcium की कमी क्या होती है भूल जाओगे ! हाथ/पैर, घुटनों, कमर दर्द जड़ से गायब

Calcium की कमी क्या होती है भूल जाओगे ! हाथ/पैर, घुटनों, कमर दर्द जड़ से गायब

बाजरा या रागी सामान्यतः दक्षिण भारत के रसोईंघरों में नियमित रूप से प्रयोग किया जाता है। वास्तव में यह दक्षिण भारत के कई गावों का प्रमुख भोजन है। रागी कैल्शियम, लौह, प्रोटीन, रेशे और अन्य खनिजों का समृद्ध स्रोत है। इस अनाज में वसा की मात्रा कम होती है और यह मुख्यतः असंतृप्त वसा होता है। यह पचने में आसान होता है और ग्लूटिन नहीं होता, इसलिये जो लोग ग्लूटिन के प्रति संवेदनशील होते हैं वे बाजरे को आसानी से प्रयोग कर सकते हैं।

रागी को सबसे अधिक पोषण वाले अनाजों में से एक माना जाता है। रागी एक अत्यधिक पोषणयुक्त अनाज है और अच्छे स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिये लाभदायक है। हलाँकि इसके अधिक मात्रा में सेवन से शरीर में ऑक्सैलिक अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिये वृक्क में पथरी वाले मरीजों को इसकी सलाह नहीं दी जाती।

मोटापा कम करने के लिये रागी

रागी में एक अमीनो अम्ल ट्रिप्टोफैन होता है जिससे भूख कम लगती है और भार को नियन्त्रित करने में सहायक होता है। रागी धीमी दर से पचता है इसलिये अतिरिक्त कैलोरी ग्रहण करने से रोकता है। रागी में रेशे होने के कारण भी पेट भरा होने का अहसास होता है इसलिये अतिरिक्त भोजन की खपत को नियन्त्रित करता है।

हड्डियों के स्वास्थ्य के लिये रागी

रागी कैल्शियम के मामले में समृद्ध होता है इसलिये हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है। यह बढ़ते बच्चों और वृद्ध हो रहे लोगों के लिये कैल्शियम का सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक स्रोत है।

मधुमेह के लिये रागी

बाजरे में उपस्थित रसायन पाचन की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक होते हैं। मधुमेह की स्थिति में यह रक्त में शर्करा की मात्रा को नियन्त्रित करने में सहायक होता है।

रक्त में कोलेस्ट्रॉल की कमी के लिये रागी

इसमें लेसिथिन और मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल होते हैं जो यकृत से अतिरिक्त वसा को हटा कर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करते हैं।

खून की कमी के लिये रागी

रागी लौह का बहुत अच्छा प्राकृतिक स्रोत है। रागी की खपत से खून की कमी की स्थिति बेहतर होती है।

शान्ति के लिये रागी

रागी की खपत से शरीर प्राकृतिक रूप से शान्त होता है। यह उत्सुक्ता, अवसाद और नींद न आने की स्थितियों में फायदेमन्द होता है। रागी माइग्रेन के लिये भी लाभदायक है।

प्रोटीन या अमीनो अम्ल के लिये रागी

शरीर की सामान्य क्रियाशीलता तथा मरम्मत के लिये आवश्यक अमीनो अम्ल के मामले में रागी काफी धनी है। यह शरीर में नाइट्रोजन सन्तुलन के लिये भी सहायक है।

अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के लिये रागी

यदि रागी का नियमित रूप से सेवन किया जाय तो यह कुपोषण, क्षरण सम्बन्धी रोग और असमय वृद्ध होने की प्रक्रियाओं को दूर करता है।

उच्च रक्त चाप को ठीक करता है

उच्च रक्तचाप, यकृत रोगों, हृदय की कमजोरी, अस्थमा से ग्रस्त लोगों तथा दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की कमी के लिये यह टॉनिक का कार्य करता है।

साबूदाना

सफेद मोतियों की तरह दिखने वाला छोटे आकार क साबूदान व्रत-उपवास में प्रमुख रूप से खाया जाता है। वैसे तो इसका प्रयोग केवल फलाहार के तौर पर किया जाता है, लेकिन इसके गुणों से अभी तक कई लोग अनजान ही है। अगर आप भी नहीं जानते इसके गुणों के बारे में तो जानिए साबूदाने के यह 10 प्रमुख लाभ

1 गर्मी पर नियंत्रण

एक शोध के अनुसार साबूदाना आपको तरोताजा रखने में मदद करता है, और इसे चावल के साथ प्रयोग किए जाने पर यह शरीर में बढ़ने वाली गर्मी को कम कर देता है।

2 दस्त लगने पर

जब किसी कारण से पेट खराब होने पर दस्त या अतिसार की समस्या होती है, तो ऐसे में बगैर दूध डाले साबूदाने की बनी हुई खीर बेहद असरकारक साबित होती है और तुरंत आराम देती है।

3 ब्लड प्रेशर

साबूदाने में पाया जाने वाल पोटेशियम रक्त संचार को बेहतर कर, उसे नियंत्रित करता है, जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। इसके अलावा यह मांसपेशियों के लिए भी फयदेमंद है।

4 पेट की समस्याएं

पेट में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर साबूदाना खाना काफी लाभप्रद सिद्ध होता है, और यह पाचनक्रिया को ठीक कर गैस, अपच आदि समस्याओं में भी लाभ देता है।

5 एनर्जी

साबूदाना कार्बोहाइड्रेट का एक अच्छा स्त्रोत है, जो शरीर में तुरंत और आवश्यक उर्जा देने में बेहद सहायक होता है।

6 गर्भ के समय

साबूदाने में पाया जाने वाला फोलिक एसिड और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स गर्भावस्था के समय गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में सहायक होता है।

7 हड्डियां बने मजबूत

साबूदाने में कैल्शियम, आयरन, विटामिन-के भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखने और अवश्यक लचीलेपन के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

8 वजन

जिन लोगों में ईटिंग डिसऑर्डर की समस्या होती है उनक वजन आसानी से नहीं बढ़ पाता। ऐसे में साबूदाना एक बेहतर विकलप होता है जा उसका वजन बढ़ाने में सहायक है।

9 थकान

साबूदाना खाने से थकान कम होती है। यह थकान कम कर शरीर में आवश्यक उर्जा के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है।

10 त्वचा

साबूदाने का फेसमास्क बनाकर लागाने से चेहरे पर कसाव आता है, और झुर्रियां भी कम होती है। यह त्वचा में कसाव बनाए रखने के लिए भी फायदेमंद है।

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जानिए कौन सा केला खाना चाहिए ? किस केले में है शुगर और कैंसर से बचाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स

जानिए कौन सा केला खाना चाहिए ? किस केले में है शुगर और कैंसर से बचाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स

भारत में केला हर जगह पाया जाता है और केले की सबसे अच्छी किस्में भारत में ही होती है। केले की कई किस्में होती है परन्तु इनमें माणिक्य, कदली, मत्र्य कदली, अमृत कदली, चम्पा कदली आदि मुख्य है। जंगलों में अपने आप उग आने वाले केले को वन कदली कहते हैं। असम, बंगाल और मुम्बई में केले की अनेक किस्में पाई जाती है। सुनहरे पीले व पतले छिलके वाले केले खाने में स्वादिष्ट होते हैं। मोटे छिलके वाले तिकोने केले की सब्जी बनाई जाती है।

पके और कच्चे दोनों प्रकार के केले का उपयोग होता है। पके केले का छिलका निकालकर खाया जाता है और कच्चे केले की सब्जी बनाई जाती है। केले के फूल की भी सब्जी बनाई जाती है। केले की मिठास उसमें मौजूद ग्लूकोज तत्त्व पर आधारित है। ग्लूकोज शर्करा है। यह स्नायुओं का पोषण और शक्ति प्रदान करता है। केले में विभिन्न तत्त्व पाए जाते हैं। केला शरीर को मजबूत और बलवान बनाता है। केला एक ऐसा फल है जो हर मौसम में मिलता है। पका केला रक्तस्राव और प्रदर रोग में लाभकारी होता है।

ज्यादातर लोग अधिक पका हुआ केला खाना पसंद करते हैं जबकि यह सेहत को बहुत फायदा नहीं पहुंचाता। केले के रंग के मुताबिक उसमें मौजूद पोषक तत्व भी बदल जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया के जाने माने स्पोर्ट्स डाइटीशियन रेयान पिंटो के मुताबिक, समय के साथ केले के पोषक तत्व बदलते हैं, इस लिए इसे खाने से पहले इसके रंग पर नजर जरूर डालें। जानिए इसके रंग के मुताबिक, इसकी खूबियां…

हरा केला

जानिए कौन सा केला खाना चाहिए ? किस केले में है शुगर और कैंसर से बचाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स

रेयान पिंटो के मुताबिक, हरा केला थोड़ा कच्चा होता है इसमें स्टार्च की मात्रा ज्यादा होती है। यह आसानी से पचता नहीं है। इसे खाने पर गैस बनने के कारण पेट फूल सकता है। अगर आपको लो-ग्लाइसीमित इंडेक्स वाले केले की तलाश है तो इसे खाया जा सकता है। इसे खाने पर केले में मौजूद स्टार्च टूटटकर ग्लूकोज में बदल जाता है और पके केले के मुकाबले यह ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ाता है। स्वाद में कसैला होने की वजह से इसमें ग्लूकोज का स्तर भी कम होता है।

पीला केला

जानिए कौन सा केला खाना चाहिए ? किस केले में है शुगर और कैंसर से बचाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स

पीला पड़ने पर केले में स्टार्च कम और शुगर का स्तर बढ़ जाता है। रेयान पिंटो के मुताबिक, मुलायम होने के साथ इसमें मिठास बढ़ जाती है। इसमें मौजूद पोषक तत्वों को शरीर आसानी से ग्रहण कर लेता है। जैसे-जैसे इसका रंग डार्क होता है इसमें मौजूद माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स की मात्रा घटती जाती है। एंटी-ऑक्सीडेंट्स की पूर्ति के लिए इसे अधिक पकने से पहले ही खाएं।

चित्तीदार केला

जानिए कौन सा केला खाना चाहिए ? किस केले में है शुगर और कैंसर से बचाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स

केले पर भूरे के चित्तियां आने का मतलब है कि इसमें मौजूद स्टार्च ग्लूकोज में बदल चुका है। जितने ज्यादा चित्तियां उतना ज्यादा शुगर। इस अवस्था में इसमें शुगर का स्तर अधिक बढ़ जाता है और डायबिटीज के रोगियों को इसे खाने से बचना चाहिए। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट का स्तर भी ज्यादा होता है जो कैंसर से बचाने में मदद करता है।

केला कितना फायदेमंद है

जानिए कौन सा केला खाना चाहिए ? किस केले में है शुगर और कैंसर से बचाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स

एक केला करीब 100 कैलोरी ऊर्जा देता है। इसमें फैट कम होता है और पोटेशियम, फायबर, विटामिन-बी6 और विटामिन 6 काफी मात्रा में पाया जाता है। एक औसत आकार वाले केले 3 ग्राम फायबर मिलता है। एक शोध के मुताबिक, अगर महिलाएं हफ्ते में 2-3 बार केला खाती हैं तो उनमें किडनी की बीमारी होने का खतरा 33 फीसदी तक कम हो जाता है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

सूजन: समस्त प्रकार की सूजन में केला लाभकारी होता है।

चोट या रगड़ लगना: चोट या रगड़ लगने पर केले के छिलके को उस स्थान पर बांधने से सूजन नहीं बढ़ती। पका हुआ केला और गेहूं का आटा पानी में मिलाकर गर्म करके लेप करें।

गैस्ट्रिक अल्सर:

गैस्टिक अल्सर के रोग से पीड़ित रोगी को दूध और केला एक साथ खाना चाहिए।
केले को खाने से आंतों की सूजन, आमाशय का जख्म, जठरशोथ, कोलिटिस की सूजन और अतिसार आदि की बीमारियों में लाभ मिलता है।
केला और दूध को सेवन करने से पेट के अल्सर में लाभ मिलता है।
हृदय का दर्द: 2 केले 15 ग्राम शहद के साथ मिलाकर खाने से हृदय का दर्द ठीक होता है।

मिट्टी खाना: अगर बच्चे को मिट्टी खाने की आदत हो तो पका हुआ केला शहद में मिलाकर खिलाना चाहिए। इसके सेवन से मिट्टी खाने की आदत छूट जाती है।

दाद, खाज: केले के गूदे को नींबू के रस में पीस लें और दाद, खाज व खुजली में लगाएं। इससे दाद, खाज, खुजली दूर होती है।

पेट का दर्द: किसी भी प्रकार के पेट दर्द में केला खाना लाभकारी होता है। केला बच्चों और दुर्बल लोगों के लिएं पोषक आहार है। दस्त, पेट का दर्द और आमाशय व्रण में भोजन के रूप में केला खाना लाभकारी होता है।

दस्त:

2 केला लगभग 100 ग्राम दही के साथ कुछ दिन तक खाने से दस्त व पेचिश को ठीक करता है।
केले के पेड़ के तने को पीसकर, 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में रस निकालकर पीने से दस्तों का बार-बार आना बंद होता है।
कच्चे केले को उबालकर रोटी बनाकर अरूआ के भरते के साथ खाने से पुराना अतिसार रोग ठीक होता है।
केले और थोड़ा सा केसर दही में मिलाकर खाने से लाभ मिलता हैं।
मुंह के छाले: जीभ पर छाले होने पर एक केला गाय के दही के साथ सुबह के समय सेवन करने से लाभ होता है।

आग से जल जाना: आग से जल जाने पर केले को पीसकर लगाना लाभकारी होता है।

नाक से खून आना: 1 गिलास दूध में चीनी मिलाकर 2 केले के साथ प्रतिदिन 10 दिनों तक खाने से नाक से खून आना बंद होता है।

पेशाब का रुक जाना:

केले के तने का रस 4 चम्मच और घी 2 चम्मच मिलाकर पीने से बंद हुआ पेशाब खुलकर आता है। इसके सेवन से पेशाब तुरंत आ जाता है।
केले की जड़ के बीच के भाग वाले गूदे को पीसकर पेट के नाभि के नीचे तक लेप करने से बंद पेशाब खुलकर आने लगता है।
एक पका केला खाकर आंवले के रस में चीनी मिलाकर पीने से पेशाब की रुकावट दूर होती है।
केले के तने का रस गाय के मूत्र में मिलाकर पीने से पेशाब खुलकर आता है।
पेशाब का बार-बार आना:

प्रतिदिन खाना खाने के बाद दो पके केले खाने से पेशाब का बार-बार आना बंद होता है।
पका केला और आंवले का रस मीठे दूध के साथ सेवन करने से मूत्र रोग ठीक होता है।
पका हुआ केला, अमलतास, विदारीकन्द तथा शतावर को पीसकर दूध के साथ खाने से पेशाब का बार-बार आना बंद होता है।
पका हुआ 2 केला, एक चम्मच आंवले का रस और 10 ग्राम मिश्री मिलाकर 4 से 5 दिनों तक पीने से बार-बार पेशाब आना रोग ठीक होता है।

उच्च रक्तचाप:

केले में पोटैशियम की अधिकता के कारण यह उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए विशेष लाभकारी होता है। केला खाने से उच्च रक्तचाप सामान्य बना रहता है।
प्रतिदिन एक पका केला खाली पेट खाने और ऊपर से इलायची के दो दाने चबाने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) सामान्य बनता है।
आन्त्रज्वर (टायफाइड): आन्त्रज्वर से पीड़ित रोगी को के लिए केला एक अच्छा भोजन है। इससे प्यास कम लगती है।

पित्त रोग: पका केला घी के साथ खाने से पित्त रोग मिटता है।

हिचकी:

जंगली कदली केले के पत्ते की राख 1 ग्राम को 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बंद होती है।
3 ग्राम केले की जड़ को पानी के साथ घिसकर उसमें चीनी या मिश्री मिलाकर सेवन करने से हिचकी नहीं आती है।
पेडू़: कदली के पेड़ के गर्भ का रस निकालकर पीने से पेडू में पहुंचे हुए जहर दूर हो जाते है।

जलन: केले और कमल के पत्तों पर सोने से शरीर की जलन शांत होती है।

पेचिश:

केले को नींबू के साथ खाने से पेचिश रोग मिटता है और आहार शीघ्र ही पचता है। केले में दही मिलाकर खाने से पेचिश और दस्तों में लाभ होता है।

प्रदर: पके केले, आंवलों का रस और शर्करा इकट्ठा कर स्त्रियों को पिलाने से प्रदर और बहुमूत्र मिटता है।

Source – DB Group

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रोज सुबह पिएं काले नमक का पानी, बॉडी पर होंगे ये 15 असर

रोज सुबह पिएं काले नमक का पानी, बॉडी पर होंगे ये 15 असर

काला नमक नेचुरल नमक है, जिसमें करीब 80 फायदेमंद मिनरल्स पाए जाते हैं। इसलिए पुराने समय में कई औषधियां बनाने में इसका इस्तेमाल होता रहा है। हेल्दी रहने के लिए आप रोज सुबह काले नमक का पानी पी सकते हैं। यह ड्रिंक मोटापा, इनडाइजेशन जैसे कई हेल्थ प्रॉब्लम्स से आपको बचाएगा। ब्लैक सॉल्ट वाटर के अनेक फायदों के कारण इसे Soul Water का नाम भी दिया गया है।

कैसे बनाएं ब्लैक सॉल्ट वाटर एक गिलास गुनगुने पानी में आधा छोटा चम्मच काला नमक डालकर मिलाएं। इसे खाली पेट पिएं। हम आपको बता रहे हैं कि रेग्युलर इस पानी को पीने से कितने फायदे मिल सकते हैं।

1- स्ट्रांग मसल्स –

काला नमक बॉडी को पोटेशियम कमजोर करने में मदद करता है इसे मसल सॉन्ग होती है और इंसान की प्रॉब्लम दूर होती है

2- वजन घटेगा –

ब्लैक साल्ट वाटर बॉडी फैट घटाने में बहुत मदद करता है रोज इसे पीने से मोटापा दूर होगा

3- डायजेशन सुधरेगा –

कालानमक पेट के अंदर हाइड्रो हाइड्रोक्लोरिक एसिड और प्रोटीन डाइजेस्ट करने वाले इंजॉय एक्टिव करता है इससे डाइजेशन सुधरता है

4- हल्दी स्किन –

काले नमक में मौजूद सल्फर सिंह जैसे न्यू ट्रेन न्यू फ्रेंड्स न्यूट्रिएंट्स और ड्राई स्किन की प्रॉब्लम दूर करते हैं पानी पीने से स्किन हल्दी होगी और ग्लो बढ़ेगा

5- मजबूत हड्डियां –

काले नमक में मौजूद मिनरल हड्डियों को स्ट्रांग बनाते हैं

6- गैस और कब्ज –

काले नमक में मौजूद सोडियम क्लोराइड, आयरन ऑक्साइड, पेट में बनने वाली गैस की प्रॉब्लम दूर करते हैं. ये पानी पीने से खाना खाने के बाद पेट भारी भारी लगने की प्रॉब्लम दूर होती है

7- पेट नहीं फूलेगा –

काले नमक का पानी पीने से पेट फूलने और खाना खाने के बाद पेट भारी भारी लगने की प्रॉब्लम दूर होती है

8- आंखों की रोशनी –

रेगुलर काले नमक का पानी पीने से आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद मिलेगी.

9- घने बाल –

काले नमक में मौजूद मिनरल बालों की ग्रोथ में मददगार है रोज इसका पानी पीने से बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ दूर होगा

10- हल्दी हार्ट –

काला नमक कोलेस्ट्रोल कंट्रोल करने में मदद करता है रोज इसका पानी पीने से हार्ड बीमारी का खतरा टलेगा

11- डायबिटीज –

काला नमक इंसुलिन का लेवल कंट्रोल करता है इससे डायबिटीज कंट्रोल होती है और डायबटीज का खतरा भी टलता है

12- अच्छी नींद –

काले नमक में मौजूद मिनरल बॉडी में स्ट्रेस हारमोंस कंट्रोल करते हैं इससे रात को नींद ना आने की प्रॉब्लम दूर होती है

13- गले की खराश –

काले नमक का पानी पीने से गले की खराश और दर्द की प्रॉब्लम दूर होती है

14- खून की कमी –

काले नमक में भरपूर आयरन होता है उसका पानी पीने से एनीमिया खून की कमी की प्रॉब्लम दूर होगी

15- बीमारियों से बचाए –

काले नमक का पानी बॉडी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करता है रोज इसे पीने से कहीं हेल्थ प्रॉब्लम्स का खतरा चलता है

इस विडियो में देखिए आपको कौन सा नमक खाना चाहिये >>

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खर्राटे, सर्दी जुकाम, बाल झाड़ना, मूत्र समस्या, कब्ज आदि का घरेलू उपचार इलाज

खर्राटे, सर्दी जुकाम, बाल झाड़ना, मूत्र समस्या, कब्ज आदि का घरेलू उपचार इलाज

बच्चों की नाक अगर बहुत बहती है बार बार सर्दी जुकाम होता है वागभट्ट जी कहते हैं नाक बहुत बहती हो, सर्दी जुकाम हो तो गौ का घी एक एक बूँद नाक मैं डाल दो सर्दी जुकाम ऐसे गायब होगा जैसे गधे के सिर से सींग.

अगर नींद नही आती या अच्छी नींद लेनी है, गहरी नींद लेनी है गाय का घी एक एक बूँद नाक में डालकर सो जाओ बहुत गहरी नींद आयेगी. आपको खराटे बंद करने हैं, तो जिनको भी खराटे आते हैं रात में तो गाय का घी एक एक बूँद नाक में डाल लो 3 दिन बाद चौथे दिन से खराटे आने बंद हो जाएंगे.

अगर आपके बाल झड़ते हैं तो गाय का दूध लें उसकी दही बनाओ. उस दही को 5-6 दिन तांबे के बर्तन में रहने दो. दही का रंग हरा-हरा हो जायेगा. फिर उस दही को बालों में लगाओ फिर 1 घंटे बाद शिकाकाई से बाल धो लो हफ्ते में ऐसा 4 बार करें और बाल टूटना एक ही हफ्ते में बंद हो जायेंगे. भविष्य में बाल न टूटें, अच्छे रहें, दरुस्त रहें, तंदरुस्त रहें तो महीने में एक बार या फिर दो बार गाय के मूत्र से बाल धो लें. बहुत अच्छा नेचुरल कंडीशनर है. तो जैसे कंडीशनर यूज करते हैं वैसे ही गौमूत्र का इस्तेमाल करें गाय के मूत्र में थोडा पी मिला लें और जैसे कंडीशनर यूज करते हैं वैसे ही इस्तेमाल करें.

अगर बच्चों की पसलियाँ बहुत ही तकलीफ में हो, जैसे कि कई बार पसलियों में बलगम जम गया तो एक ही चम्मच गौ मूत्र पिला दें. एक ही दिन में बलगम बाहर आ जाएगी. बड़ों को अगर पीना है तो आधे कप तक पी सकते हैं.

इसके बाद जितने भी किडनी या मूत्र सम्बंधित रोग है इनमें सबसे अच्छी दवा है गौमूत्र. जैसे अगर पेशाब थोडा थोडा आता है गौमूत्र पीना शुरू करो खुल के आएगा. पेशाब में जलन होती है पेशाब पीना शुरू करें जलन बंद हो जाएगी. पेशाब अगर लाल रंग का आता है तो गौमूत्र पीना शुरू करो. नार्मल कलर आयेगा मूत्र के लगभग 22-23 रोग इस अकेले गौमूत्र से आता हैं.

यदि आपको कब्जियत बहुत है पेट साफ़ नही हो रहा है तीन दिन आधा आध कप गौमूत्र पी लो चोथे दिन से पेट एक दम साफ़.

फिर यदि आपके शरीर में बीसियों रोग हैं वात, पित्त और कफ के. पित्त के रोगी विशेष दयां रखें कि जब वे गौमूत्र लें तो गौ का घी ज्यादा उपयोग करें. पेट में गैस बन रही है या एसिडिटी बन रही है ये रोग पित्त के रोग हैं. यदि इसे ठीक करने के लिए गौ मूत्र का उपयोग कर रहे हैं तो घी ज्यादा खाएं.

यदि आपके शरीर पे जितने भी सफ़ेद दाद या धब्बे है सब चले जायेंगे. आँखों के नीचे डार्क सर्किल है रोज सुबह आँखों के नीचे लगा लें. डार्क सर्किल चले जायेगे खाज-खुजली या दाद हो गये हैं तो थोड़ी मालिश करिए तुरंत चला जायेगा.

नोट : ध्यान यहाँ सभी जगह सिर्फ देशी गाय के घी, मूत्र का ही जिक्र किया गया हैं किसी अन्य नस्ल की गाय का घी, मूत्र उपयोगी नही है.

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वागभट्ट जी कहते हैं आँख का कोई भी रोग सभी कफ के रोग है जैसे मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और रेटिनल डीटेचमेंट जिसका तो दुनिया में कोई भी इलाज है ही नही ऑपरेशन भी नही है उसका हो भी तो सफल नही है अगर अमेरिका भी चले जायें इलाज के लिए तो डॉक्टर भी कहेंगे ओप्रतिओं तो कर देंगे लेकिन विज़न आने की कोई गारंटी नही है, और आँखों का लाल होना आँखों से पानी आना आँखों में जलन होना तो ऐसी छोटी से लेकर बड़ी बीमारी ये सभी गौमूत्र से ठीक होती हैं

और कंट्रोल नही क्योर(cure) होती है जड़ से खत्म होती है बस करना इतना ही है कि देसी गाय का मूत्र कपडे से छानकर एक एक बूँद आँख में डालनी है सवा 1 महीने में चश्मे का नंबर बदल जायेगा और 3 महीने में चश्मा उतर जायेगा ग्लूकोमा 4 सवा 4 महीने में बिलकुल ठीक होता है केटरेक्ट अगर ठीक करना हो तो 6 महीने में ठीक हो जायेगा और रेटिनल डीटेचमेंट अगर ठीक करना हो तो 1 साल से डेढ़ साल तक लगता है लेकिन लगातार डालते रहिये 1-1 बूँद गौमूत्र डालते रहिये.

बच्चों के अगर कान बह रहे हैं कान से अगर मवाद निकल रहा है तो 2 या 3 दिन 1-1 बूँद सुबह शाम डाल दीजिये मवाद निकलना बंद हो जायेगा.

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कभी भी गिलास में पानी ना पियें, जानिए लोटा और गिलास के पानी में अंतर

कभी भी गिलास में पानी ना पियें, जानिए लोटा और गिलास के पानी में अंतर

भारत में हजारों साल की पानी पीने की जो सभ्यता है वो गिलास नही है, ये गिलास जो है विदेशी है. गिलास भारत का नही है. गिलास यूरोप से आया. और यूरोप में पुर्तगाल से आया था. ये पुर्तगाली जबसे भारत देश में घुसे थे तब से गिलास में हम फंस गये. गिलास अपना नही है. अपना लौटा है. और लौटा कभी भी एकरेखीय नही होता. तो वागभट्ट जी कहते हैं कि जो बर्तन एकरेखीय हैं उनका त्याग कीजिये. वो काम के नही हैं. इसलिए गिलास का पानी पीना अच्छा नही माना जाता. लौटे का पानी पीना अच्छा माना जाता है. इस पोस्ट में हम गिलास और लोटा के पानी पर चर्चा करेंगे और दोनों में अंतर बताएँगे.

फर्क सीधा सा ये है कि आपको तो सबको पता ही है कि पानी को जहाँ धारण किया जाए, उसमे वैसे ही गुण उसमें आते है. पानी के अपने कोई गुण नहीं हैं. जिसमें डाल दो उसी के गुण आ जाते हैं. दही में मिला दो तो छाछ बन गया, तो वो दही के गुण ले लेगा. दूध में मिलाया तो दूध का गुण.

लौटे में पानी अगर रखा तो बर्तन का गुण आयेगा. अब लौटा गोल है तो वो उसी का गुण धारण कर लेगा. और अगर थोडा भी गणित आप समझते हैं तो हर गोल चीज का सरफेस टेंशन कम रहता है. क्योंकि सरफेस एरिया कम होता है तो सरफेस टेंशन कम होगा. तो सरफेस टेंशन कम हैं तो हर उस चीज का सरफेस टेंशन कम होगा. और स्वास्थ्य की दष्टि से कम सरफेस टेंशन वाली चीज ही आपके लिए लाभदायक है.अगर ज्यादा सरफेस टेंशन वाली चीज आप पियेंगे तो बहुत तकलीफ देने वाला है. क्योंकि उसमें शरीर को तकलीफ देने वाला एक्स्ट्रा प्रेशर आता है.

गिलास और लोटा के पानी में अंतर

गिलास के पानी और लौटे के पानी में जमीं आसमान का अंतर है. इसी तरह कुंए का पानी, कुंआ गोल है इसलिए सबसे अच्छा है. आपने थोड़े समय पहले देखा होगा कि सभी साधू संत कुए का ही पानी पीते है. न मिले तो प्यास सहन कर जाते हैं, जहाँ मिलेगा वहीं पीयेंगे. वो कुंए का पानी इसीलिए पीते है क्यूंकि कुआ गोल है, और उसका सरफेस एरिया कम है. सरफेस टेंशन कम है. और साधू संत अपने साथ जो केतली की तरह पानी पीने के लिए रखते है वो भी लोटे की तरह ही आकार वाली होती है. जो नीचे चित्र में दिखाई गई है.

सरफेस टेंशन कम होने से पानी का एक गुण लम्बे समय तक जीवित रहता है. पानी का सबसे बड़ा गुण है सफाई करना. अब वो गुण कैसे काम करता है वो आपको बताते है. आपकी बड़ी आंत है और छोटी आंत है, आप जानते हैं कि उसमें मेम्ब्रेन है और कचरा उसी में जाके फंसता है. पेट की सफाई के लिए इसको बाहर लाना पड़ता है. ये तभी संभव है जब कम सरफेस टेंशन वाला पानी आप पी रहे हो. अगर ज्यादा सरफेस टेंशन वाला पानी है तो ये कचरा बाहर नही आएगा, मेम्ब्रेन में ही फंसा रह जाता है.

दुसरे तरीके से समझें, आप एक एक्सपेरिमेंट कीजिये. थोडा सा दूध ले और उसे चेहरे पे लगाइए, 5 मिनट बाद रुई से पोंछिये. तो वो रुई काली हो जाएगी. स्किन के अन्दर का कचरा और गन्दगी बाहर आ जाएगी. इसे दूध बाहर लेकर आया. अब आप पूछेंगे कि दूध कैसे बाहर लाया तो आप को बता दें कि दूध का सरफेस टेंशन सभी वस्तुओं से कम है. तो जैसे ही दूध चेहरे पर लगाया, दूध ने चेहरे के सरफेस टेंशन को कम कर दिया क्योंकि जब किसी वस्तु को दूसरी वस्तु के सम्पर्क में लाते है तो वो दूसरी वस्तु के गुण ले लेता है.

इस एक्सपेरिमेंट में दूध ने स्किन का सरफेस टेंशन कम किया और त्वचा थोड़ी सी खुल गयी. और त्वचा खुली तो अंदर का कचरा बाहर निकल गया. यही क्रिया लोटे का पानी पेट में करता है. आपने पेट में पानी डाला तो बड़ी आंत और छोटी आंत का सरफेस टेंशन कम हुआ और वो खुल गयी और खुली तो सारा कचरा उसमें से बाहर आ गया. जिससे आपकी आंत बिल्कुल साफ़ हो गई. अब इसके विपरीत अगर आप गिलास का हाई सरफेस टेंशन का पानी पीयेंगे तो आंते सिकुडेंगी क्यूंकि तनाव बढेगा. तनाव बढते समय चीज सिकुड़ती है और तनाव कम होते समय चीज खुलती है. अब तनाव बढेगा तो सारा कचरा अंदर जमा हो जायेगा और वो ही कचरा भगन्दर, बवासीर, मुल्व्याद जैसी सेंकडो पेट की बीमारियाँ उत्पन्न करेगा.

इसलिए कम सरफेस टेंशन वाला ही पानी पीना चाहिए. इसलिए लौटे का पानी पीना सबसे अच्छा माना जाता है, गोल कुए का पानी है तो बहुत अच्छा है. गोल तालाब का पानी, पोखर अगर खोल हो तो उसका पानी बहुत अच्छा. नदियों के पानी से कुंए का पानी अधिक अच्छा होता है. क्योंकि नदी में गोल कुछ भी नही है वो सिर्फ लम्बी है, उसमे पानी का फ्लो होता रहता है. नदी का पानी हाई सरफेस टेंशन वाला होता है और नदी से भी ज्यादा ख़राब पानी समुन्द्र का होता है उसका सरफेस टेंशन सबसे अधिक होता है.

अगर प्रकृति में देखेंगे तो बारिश का पानी गोल होकर धरती पर आता है. मतलब सभी बूंदे गोल होती है क्यूंकि उसका सरफेस टेंशन बहुत कम होता है. तो गिलास की बजाय पानी लौटे में पीयें. तो लौटे ही घर में लायें. गिलास का प्रयोग बंद कर दें. जब से आपने लोटे को छोड़ा है तब से भारत में लौटे बनाने वाले कारीगरों की रोजी रोटी ख़त्म हो गयी. गाँव गाँव में कसेरे कम हो गये, वो पीतल और कांसे के लौटे बनाते थे. सब इस गिलास के चक्कर में भूखे मर गये. तो वागभट्ट जी की बात मानिये और लौटे वापिस लाइए.

सब लिख पाना असंभव है ये विडियो देखें >>

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10 गुणा लाभ देने वाली इस तकनिकी का जवाब नही, हर गाँव तक पहुचनी चाहिए

10 गुणा लाभ देने वाली इस तकनिकी का जवाब नही, हर गाँव तक पहुचनी चाहिए

मध्य प्रदेश के धार जिले के एक किसान रवि पटेल ने प्याज स्टोरेज की एक देसी कारगर तकनीक बनाई है। इसे अपनाकर वे दो साल से प्याज को खेत से निकालते ही 2 से 3 रुपए किलो के भाव पर बेचने के बजाय बारिश बाद 30 से 35 रुपए किलाे में बेच कर लाभ कमा रहे हैं। तीसरे साल भी उन्होंने प्याज का इसी तकनीक से स्टोरेज किया है।

इस किसान ने देसी टेक्नोलॉजी से बनाया कोल्ड स्टोरेज, ऐसे करता है काम >>

कैसे काम करती है रवि की ये टेक्नोलॉजी…

– रवि बंद कमरे में लोहे की जाली को जमीन से 8 इंच ऊंचा बिछाते हैं। ऐसा करने के लिए कुछ-कुछ दूरी पर दो-दो ईंटें रखते हैं। उसके ऊपर प्याज का स्टोरेज करते हैं।

– लगभग 100 स्क्वेयर फीट की दूरी पर एक बिना पैंदे की कोठी रखते हैं। ड्रम के ऊपरी हिस्से में एक्जॉस्ट पंखे लगा देते हैं।

– पंखे की हवा जाली के नीचे से प्याजों के निचले हिस्से से उठ कर ऊपर तक आती है। इससे पूरे प्याजों में ठंडक रहती है।

– दोपहर में हवा गर्म होती है, इसलिए दिन की बजाय रातभर पंखे चलाते हैं।

– पटेल ने इस तकनीक से 1000 क्विंटल प्याज का भंडारण किया है। 2000 क्विंटल और खेतों में हैं, जो इसी तरह भंडारण करने वाले हैं। पिछले साल उन्होंने बारिश बाद 200 क्विंटल प्याज 35 रु. किलो के भाव बेचे थे।

– पटेल ने बताया इस तकनीक से 80 प्रतिशत तक सड़न नियंत्रित होती है। पहले जहां 10 प्याज खराब होते थे, तो अब 2 होते हैं।

– वजह यह है कि किसी प्याज में सड़न लगती थी, तो आसपास के प्याज खराब कर देता था। अब कोई प्याज सड़ता है तो पंखे की हवा से वहीं सूख जाता है।

क्या कहते हैं रवि पटेल

पटेल बताते हैं प्याज की फसल अमूमन मार्च-अप्रैल में निकलती है। इस समय आवक अधिक होने से प्याज का मंडी भाव 2 से 3 रु. किलाे तक पहुंच जाता है। बारिश के बाद यही भाव 30 से 35 रु. किलो न्यूनतम होता है लेकिन प्याज गर्मी से जल्दी खराब होने के कारण इसका स्टोरेज किसान के लिए चुनौती होता है। किसान जहां भंडारण करते हैं, वहां पंखे-कूलर की व्यवस्था करते हैं लेकिन ढेर में प्याज एक-दूसरे की गर्मी से ही खराब हो जाते हैं। इसलिए मैंने ऐसी तकनीक लगाई है कि हर प्याज को जमीन से ही ठंडक मिले। कोई प्याज खराब भी हो तो ढेर में मौजूद आसपास के प्याज खराब नहीं हो।

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मच्छर काटना तो दूर आपके पास भी नहीं आ पाएंगे, मात्र 1 मिनिट में मच्छर भगाये

मच्छर काटना तो दूर आपके पास भी नहीं आ पाएंगे, मात्र 1 मिनिट में मच्छर भगाये

गर्मियों का मौसम आते ही सबसे बड़ी समस्या जो सामने आती है वह है मच्छरों की समस्या। गर्मियों में मच्छर इतने ज्यादा होते हैं कि वह हमें बहुत परेशान करते हैं। मच्छरों के कारण गर्मियों के मौसम में डेंगू नामक घातक बीमारी होती है। बहुत सारे लोग मच्छरों को मारने के लिए बाजार में आने वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन उनका भी कोई असर नहीं होता है इसलिए आज हम आपको मच्छरों को मारने के लिए एक ऐसा उपाय बताएंगे जिससे आपको मच्छरों से पूर्ण रुप से सुरक्षा मिल जाएगी।

हमारे देश में बहुत सारी औषधियां ऐसी हैं जिनका इस्तेमाल कर हम किसी भी तरह की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आज हम आपको एक ऐसे पत्ते के बारे में बताएंगे जिसका इस्तेमाल कर आप अपने कमरे के सारे मच्छरों को खत्म कर सकते हैं । जिस पत्ते की हम बात कर रहे हैं उसे तेजपत्ता के नाम से जाना जाता है ।

तेजपत्ता मधुमेह, अल्ज़ाइमर्स, बांझपन, खांसी जुकाम , जोड़ो का दर्द, रक्तपित्त, रक्तस्त्राव, दाँतो की सफाई, सर्दी जैसे अनेक रोगो में उपयोगी है। ये हमेशा हरा रहने वाले पेड़ तमाल वृक्ष के पत्ते हैं इसको तमालपत्र, तेज पात या तेजपत्ता कहते हैं। तेजपात मसाले के रूप में बहुतायत में काम लेते हैं।

यह सिक्किम, हिमालय, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में पैदा होते हैं। तेजपात पेड़ से पत्ते तोड़कर धुप में सुखाकर पंसारी की दुकानो पर बेचे जाते हैं। तेजपत्ता में दर्दनाशक, एंटी ऑक्सीडेंट गुण हैं। तेजपत्ता मधुर, कुछ तीक्षण, उष्ण, चिकना, तैलीय होता हैं। वात, कफ नाशक और पाचक होता हैं। आयुर्वेद में अनेक गंभीर रोगो में इसके उपयोग किये जाते हैं। आइये जाने।

इस पत्ते को जलाने से दोबारा कभी भी मार्टिन जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, तेजपत्ता हमारे देश में लगभग हर घर में मिल जाता है । कमरे के मच्छरों को मारने के लिए सबसे पहले चार तेजपत्ता लें, इन्हें घर के चार कोनों में जलाकर छोड़ दें और 15 मिनट के लिए कमरे के सभी दरवाजे और खिड़कियां बंद कर दें । 15 मिनट के बाद जब आप कमरे में जाएंगे तो आप देखेंगे कि कमरे के सभी मच्छर मर कर कर नीचे गिरे हुए हैं । इन पत्तों को जलाने को जलाने से जो धुआं निकलता है वह मच्छरों के लिए बहुत घातक होता है इसलिए इससे सारे मच्छर मर जाते हैं । इस पत्ते को जलाने के बाद आपके कमरे में दोबारा मच्छर नहीं आएंगे

सोने से पहले कमरे में जलाएं केवल 1 तेज पत्ता, सिर्फ़ 15 मिनट में आपको जो फ़ायदा होगा जिसकी आपने कभी कल्पना नही की होगी

रात को अच्छी नींद सोना है तो ज़रूरी है आपको किसी तरह का कोई तनाव न हो। आपका मन शांत हो। आप सुकून महसूस करें। लेकिन अमूमन ये हो नहीं पाता। दिनभर चाहे आप दफ्तर में रहें, कॉलेज जाएं या घर के कामों में उलझे रहें… तनाव हो ही जाता है। तनाव यानी स्ट्रेस। ये तनाव आपको रात को सोने नहीं देता। ये आपको मानसिक और शारीरिक तरीके से नुकसान पहुंचाता है। अगर आप छोटी सी कोशिश करें तो तनाव को मिनटों में दूर कर सकते हैं।

इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं बस एक तेज़ पत्ता चाहिए। तेज़ पत्ता हर किसी की किचन में बड़े ही आराम से मिल जाता है। ये सिर्फ 5 मिनट में आपके तनाव को दूर करने की क्षमता रखता है। एक रशियन साइंटिस्ट ने इस पर स्टडी की और पाया कि यह हमारे तनाव को दूर कर सकता है। यही वजह है कि तेज पत्‍ते को अरोमाथैरेपी के लिये इस्‍तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, तेज़ पत्ता यह त्‍वचा की बीमारियों और सांस से संबन्‍धित समस्‍याओं को भी ठीक करने के लिये जाना जाता है।

कैसे करें इस्तेमाल

एक तेज पत्ता लें और उसे किसी कटोरी या एैशट्रे में जला लें। अब इसे कमरे के अंदर लाकर 15 मिनट के लिए रख देंगे। आप पाएंगे कि तेज पत्‍ते की खुशबू पूरे कमरे में भर जाएगी। साथ ही आपको कमरे का माहौल काफी सुकून वाला लगेगा। ये आपको स्पा एक्सपीरियेंस देगा। कुछ देर इस कमरे में रिलेक्स होकर बैठ जाएं, आपको अपने अंदर सुकून बहता हुआ महसूस होगा और आपका तनाव कम होने लगेगा।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

सर्दी-जुकाम : चाय पत्ती की जगह (स्थान) तेजपात के चूर्ण की चाय पीने से छीकें आना, नाक बहना, जलन, सिर दर्द दूर होता है। तेजपात की छाल 5 ग्राम और छोटी पिप्पली 5 ग्राम को पीसकर 2 चम्मच शहद के साथ चटाने से खांसी और जुकाम नष्ट होता है। 1 से 4 ग्राम तेजपत्ता के चूर्ण को सुबह और शाम गुड़ के साथ खाने से धीरे-धीरे जुकाम ठीक हो जाता है।

सिर की जुंए : तेजपात के 5 से 6 पत्तों को 1 गिलास पानी में इतना उबालें कि पानी आधा रह जाये और इस पानी से प्रतिदिन सिर में मालिश करने के बाद स्नान करना चाहिए। इससे सिर की जुंए मरकर निकल जाती हैं।

आंखों के रोग : तेजपत्ते को पीसकर आंख में लगाने से आंख का जाला और धुंध मिट जाती है। आंख में होने वाला नाखूना रोग भी इसके प्रयोग से कट जाता है।

रक्तस्राव (खून का बहना) : नाक, मुंह, मल व मूत्र किसी भी अंग से रक्त (खून) निकलने पर ठंडा पानी 1 गिलास में 1 चम्मच पिसा हुआ तेजपात मिलाकर हर 3 घंटे के बाद से सेवन करने से खून का बहना बंद हो जाता है।

दमा (श्वास) : तेजपात और पीपल को 2-2 ग्राम की मात्रा में अदरक के मुरब्बे की चाशनी में छिड़ककर चटाने से दमा और श्वासनली के रोग ठीक हो जाते हैं। सूखे तेजपात का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में 1 कप गरम दूध के साथ सुबह-शाम को प्रतिदिन खाने से श्वास और दमा रोग में लाभ मिलता है।

खांसी : लगभग 1 चम्मच तेजपात का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से खांसी ठीक हो जाती है।
तेजपात की छाल और पीपल को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर उसमें 3 ग्राम शहद मिलाकर चाटने से खांसी में आराम मिलता है। तेजपात (तेजपत्ता) का चूर्ण 1 से 4 ग्राम की मात्रा सुबह-शाम शहद और अदरक के रस के साथ सेवन करने से खांसी ठीक हो जाती है

तेजपात (तेजपत्ता) की छाल का काढ़ा सुबह तथा शाम के समय में पीने से खांसी और अफारा दूर हो जाता है। 60 ग्राम बिना बीज का मुनक्का, 60 ग्राम तेजपात, 5 ग्राम पीपल का चूर्ण, 30 ग्राम कागजी बादाम या 5 ग्राम छोटी इलायची को एकसाथ पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इसके बाद इस चूर्ण को गुड़ में मिला दें। इसमें से चुटकी भर की मात्रा लेकर दूध के सेवन करने से खांसी आना बंद हो जाता है।

अफारा (पेट फूलना) : तेजपत्ते का काढ़ा पीने से पसीना आता है और आंतों की खराबी दूर होती है जिसके फलस्वरूप पेट का फूलना तथा दस्त लगना आदि में लाभ मिलता है। तेजपात का चूर्ण 1 से 4 ग्राम की मात्रा सुबह और शाम पीने से पेट में गैस बनने की शिकायत दूर होती है।

पीलिया और पथरी : प्रतिदिन पांच से छ: तेजपत्ते चबाने से पीलिया और पथरी नष्ट हो जाती है।

गर्भाशय का ढीलापन : गर्भाशय की शिथिलता (ढीलापन) को दूर करने के लिए तेजपात का प्रयोग करना चाहिए। तेजपात का चूर्ण 1 से 4 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से शिथिलता (ढीलापन) दूर हो जाती है। यदि गर्भाशय के शिथिलता (ढीलापन) के कारण गर्भपात हो रहा हो तो यह शिकायत भी इसके प्रयोग से दूर हो जाती है।

संधिवात (जोड़ों के दर्द) : तेजपत्ते को जोड़ों पर लेप करने से संधिवात ठीक हो जाता है।

स्तनों को बढ़ाने के लिए : तेजपात का चूर्ण सुबह तथा शाम सेवन करने से स्तनों के आकार में वृद्धि होती है। तेजपात का तेल किसी अन्य तेल में मिलाकर उससे स्तनों की मालिश सुबह तथा शाम को करने से स्तन के आकार में वृद्धि होती है।

सिर का दर्द : लगभग 10 ग्राम तेजपात को पानी में पीसकर माथे पर लेप करने से ठण्ड या गर्मी के कारण होने वाला सिर दर्द में आराम मिलता है। तेजपात की शाखा का छिलका निकालकर उसको पीसकर कुछ गर्म कर लें और इसे माथे के आगे के भाग में लेप की तरह लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।

बांझपन : बांझपन तथा गर्भपात की समस्या से पीड़ित स्त्री को तेजपात का चूर्ण चौथाई चम्मच की मात्रा में 3 बार पानी के साथ प्रतिदिन सेवन कराएं। इससे कुछ महीने गर्भाशय की शिथिलता दूर होकर बांझपन तथा गर्भपात की समस्या दूर हो जाती है।

निमोनिया : तेजपात, नागकेसर, बड़ी इलायची, कपूर, अगर, शीतल चीनी तथा लौंग सभी को मिलाकर तथा काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से लाभ मिलता है।

हकलाना, तुतलाना : रुक-रुक कर बोलने वाले या हकलाने वाले व्यक्ति को तेजपात जीभ के नीचे रखकर चूसना चाहिए इससे हकलाना तथा तुतलाना दूर होता है।

कमर का दर्द : 10 ग्राम अजवायन, 5 ग्राम सौंफ तथा 10 ग्राम तेजपात इन सब को कूट-पीसकर 1 लीटर पानी में उबालें। जब यह 100 ग्राम रह जाए तब इसे ठंडा करके पीएं इससे शीत लहर के कारण उत्पन्न कमर का दर्द ठीक हो जाता है।

मोच : तेजपात और लौंग को एक साथ पीसकर बना लेप बना लें। इस लेप को मोच वाले स्थान पर लगाएं इससे धीर-धीरे सूजन दूर हो जाती है और मोच ठीक हो जाता है।

मधुमेह (शूगर) का रोग : तेजपात के पत्तों का चूर्ण 1-1 चुटकी सुबह, दोपहर तथा शाम को ताजे पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह रोग ठीक हो जाता है।

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बिना घी की रोटी खाने वालों आपको मुर्ख बनाया गया है, जानिए सच्चाई क्या है

बिना घी की रोटी खाने वालों आपको मुर्ख बनाया गया है, जानिए सच्चाई क्या है

दोस्तों, हर घर से एक आवाज जरुर आती है, “मेरे लिए बिना घी की रोटी लाना”, आपके घर से भी आती होगी, लेकिन घी को मना करना सीधा सेहत को मना करना है. पहले के जमाने में लोग रोजमर्रा के खानों में घी का इस्तेमाल करते थे. घी का मतलब देसी गाय का शुद्द देशी घी. घी को अच्छा माना जाता था. और कोलेस्ट्रोल और हार्ट अटैक जैसी बीमारियाँ कभी सुनने में भी नही आती थी.

लेकिन फिर शुरू हुई घी की गलत पब्लिसिटी, बड़ी बड़ी विदेशी कंपनियों ने डॉक्टरों के साथ मिलकर अपने बेकार और यूजलेस प्रोडक्ट को सेल करने के लिए लोगों में घी के प्रति नेगेटिव पब्लिसिटी शुरू की. और ये कहा कि घी से मोटापा मोटापा आता है, कोलेस्ट्रोल बढता है, और हार्ट अटैक आने की सम्भावना बढती है. जबकि ये सरासर गलत है. जबकि रिफाइंड और दुसरे वनस्पति तेल और घी इन सब रोगों का कारण है. जब लोग बीमार होंगे तो ही डॉक्टरों का धंधा चलेगा.. इसी सोच के साथ इन विदेशी लुटेरी कंपनियों के साथ ये डॉक्टर भी मिल गए. अब इस मार्किट में कुछ स्वदेशी कंपनियां भी आ गई है. और धीरे धीरे लोगों के दिमाग में यह बात घर कर गई कि घी खाना बहुत ही नुकसानदायक है. घी न खाने में प्राउड फील करने लगे कि वो हेल्थ कांसियंस है. क्योकि जब आप एक ही चीज झूठ को बार बार टीवी पर दिखाओगे तो वो लोगो को सच लगने लगता है.

जबकि घी खाना नुकसानदायक नही बहुत ही फायदेमंद है. घी हजारों गुणों से भरपूर है, खासकर गाय का घी तो खुद में ही अमृत है. घी हमारे शरीर में कोलेस्ट्रोल को बढाता नही बल्कि कम करता है. घी मोटापे को बढाता नही बल्कि शरीर के ख़राब फैट को कम करता है. घी एंटीवायरल है और शरीर में होने वाले किसी भी इन्फेक्शन को आने से रोकता है. घी का नियमित सेवन ब्रेन टोनिक का काम करता है. खासकर बढ़ते बच्चों की फिजिकल और मेंटली ग्रोथ के लिए ये बहुत ही जरुरी है.

ये जो उठते और बैठते आपके शरीर की हड्डियों से चर मर की आवाज आती है इसकी वजह आपकी हड्डियों में लुब्रिकेंट की कमी है, अगर आप घी का नियमित सेवन करते है. तो ये आपकी मसल्स को मजबूत करता है और आपकी हड्डियों को नृश करता है.

घी हमारे इम्यून सिस्टम को बढाता है. और बिमारियों से लड़ने में आपकी मदद करता है. घी हमारे डाइजेस्टीव सिस्टम को भी ठीक रखता है जो आजकल सबसे बड़ी प्रॉब्लम है. आज हर दूसरा व्यक्ति कब्ज का मरीज है. दिन में कई कई बार शोचालय जाता है

अब हम बात करते है कि घी को कितना और कैसे खाए

एक नार्मल इन्सान के लिए 4 चम्मच घी काफी है. घी को पका कर या बिना पकाए दोनों तरीके से खा सकते है. चाहे तो इसमें खाना पका लें या फिर बाद में खाने के ऊपर डालकर खा लें. दोनों ही तरीके से घी बहुत ही फायदेमंद है.

और सबसे जरुरी बात अगर आप सबसे ग्लोइंग, शाइनिंग और यंग दिखना चाहते हैं तो घी जरुर खाएं क्योंकि घी एंटीओक्सिडेंट जोकि आपकी स्किन को हमेशा चमकदार और सॉफ्ट रखता है. आपके अपने और आसपास के सभी लोगों की अच्छी सेहत के लिए यह जानकारी उनके साथ साँझा करे. और जो बिना घी की रोटी खाते है उनको ये पोस्ट जरुर भेजे.

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