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खर्राटे, सर्दी जुकाम, बाल झाड़ना, मूत्र समस्या, कब्ज आदि का घरेलू उपचार इलाज

खर्राटे, सर्दी जुकाम, बाल झाड़ना, मूत्र समस्या, कब्ज आदि का घरेलू उपचार इलाज

बच्चों की नाक अगर बहुत बहती है बार बार सर्दी जुकाम होता है वागभट्ट जी कहते हैं नाक बहुत बहती हो, सर्दी जुकाम हो तो गौ का घी एक एक बूँद नाक मैं डाल दो सर्दी जुकाम ऐसे गायब होगा जैसे गधे के सिर से सींग.

अगर नींद नही आती या अच्छी नींद लेनी है, गहरी नींद लेनी है गाय का घी एक एक बूँद नाक में डालकर सो जाओ बहुत गहरी नींद आयेगी. आपको खराटे बंद करने हैं, तो जिनको भी खराटे आते हैं रात में तो गाय का घी एक एक बूँद नाक में डाल लो 3 दिन बाद चौथे दिन से खराटे आने बंद हो जाएंगे.

अगर आपके बाल झड़ते हैं तो गाय का दूध लें उसकी दही बनाओ. उस दही को 5-6 दिन तांबे के बर्तन में रहने दो. दही का रंग हरा-हरा हो जायेगा. फिर उस दही को बालों में लगाओ फिर 1 घंटे बाद शिकाकाई से बाल धो लो हफ्ते में ऐसा 4 बार करें और बाल टूटना एक ही हफ्ते में बंद हो जायेंगे. भविष्य में बाल न टूटें, अच्छे रहें, दरुस्त रहें, तंदरुस्त रहें तो महीने में एक बार या फिर दो बार गाय के मूत्र से बाल धो लें. बहुत अच्छा नेचुरल कंडीशनर है. तो जैसे कंडीशनर यूज करते हैं वैसे ही गौमूत्र का इस्तेमाल करें गाय के मूत्र में थोडा पी मिला लें और जैसे कंडीशनर यूज करते हैं वैसे ही इस्तेमाल करें.

अगर बच्चों की पसलियाँ बहुत ही तकलीफ में हो, जैसे कि कई बार पसलियों में बलगम जम गया तो एक ही चम्मच गौ मूत्र पिला दें. एक ही दिन में बलगम बाहर आ जाएगी. बड़ों को अगर पीना है तो आधे कप तक पी सकते हैं.

इसके बाद जितने भी किडनी या मूत्र सम्बंधित रोग है इनमें सबसे अच्छी दवा है गौमूत्र. जैसे अगर पेशाब थोडा थोडा आता है गौमूत्र पीना शुरू करो खुल के आएगा. पेशाब में जलन होती है पेशाब पीना शुरू करें जलन बंद हो जाएगी. पेशाब अगर लाल रंग का आता है तो गौमूत्र पीना शुरू करो. नार्मल कलर आयेगा मूत्र के लगभग 22-23 रोग इस अकेले गौमूत्र से आता हैं.

यदि आपको कब्जियत बहुत है पेट साफ़ नही हो रहा है तीन दिन आधा आध कप गौमूत्र पी लो चोथे दिन से पेट एक दम साफ़.

फिर यदि आपके शरीर में बीसियों रोग हैं वात, पित्त और कफ के. पित्त के रोगी विशेष दयां रखें कि जब वे गौमूत्र लें तो गौ का घी ज्यादा उपयोग करें. पेट में गैस बन रही है या एसिडिटी बन रही है ये रोग पित्त के रोग हैं. यदि इसे ठीक करने के लिए गौ मूत्र का उपयोग कर रहे हैं तो घी ज्यादा खाएं.

यदि आपके शरीर पे जितने भी सफ़ेद दाद या धब्बे है सब चले जायेंगे. आँखों के नीचे डार्क सर्किल है रोज सुबह आँखों के नीचे लगा लें. डार्क सर्किल चले जायेगे खाज-खुजली या दाद हो गये हैं तो थोड़ी मालिश करिए तुरंत चला जायेगा.

नोट : ध्यान यहाँ सभी जगह सिर्फ देशी गाय के घी, मूत्र का ही जिक्र किया गया हैं किसी अन्य नस्ल की गाय का घी, मूत्र उपयोगी नही है.

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वागभट्ट जी कहते हैं आँख का कोई भी रोग सभी कफ के रोग है जैसे मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और रेटिनल डीटेचमेंट जिसका तो दुनिया में कोई भी इलाज है ही नही ऑपरेशन भी नही है उसका हो भी तो सफल नही है अगर अमेरिका भी चले जायें इलाज के लिए तो डॉक्टर भी कहेंगे ओप्रतिओं तो कर देंगे लेकिन विज़न आने की कोई गारंटी नही है, और आँखों का लाल होना आँखों से पानी आना आँखों में जलन होना तो ऐसी छोटी से लेकर बड़ी बीमारी ये सभी गौमूत्र से ठीक होती हैं

और कंट्रोल नही क्योर(cure) होती है जड़ से खत्म होती है बस करना इतना ही है कि देसी गाय का मूत्र कपडे से छानकर एक एक बूँद आँख में डालनी है सवा 1 महीने में चश्मे का नंबर बदल जायेगा और 3 महीने में चश्मा उतर जायेगा ग्लूकोमा 4 सवा 4 महीने में बिलकुल ठीक होता है केटरेक्ट अगर ठीक करना हो तो 6 महीने में ठीक हो जायेगा और रेटिनल डीटेचमेंट अगर ठीक करना हो तो 1 साल से डेढ़ साल तक लगता है लेकिन लगातार डालते रहिये 1-1 बूँद गौमूत्र डालते रहिये.

बच्चों के अगर कान बह रहे हैं कान से अगर मवाद निकल रहा है तो 2 या 3 दिन 1-1 बूँद सुबह शाम डाल दीजिये मवाद निकलना बंद हो जायेगा.

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कभी भी गिलास में पानी ना पियें, जानिए लोटा और गिलास के पानी में अंतर

कभी भी गिलास में पानी ना पियें, जानिए लोटा और गिलास के पानी में अंतर

भारत में हजारों साल की पानी पीने की जो सभ्यता है वो गिलास नही है, ये गिलास जो है विदेशी है. गिलास भारत का नही है. गिलास यूरोप से आया. और यूरोप में पुर्तगाल से आया था. ये पुर्तगाली जबसे भारत देश में घुसे थे तब से गिलास में हम फंस गये. गिलास अपना नही है. अपना लौटा है. और लौटा कभी भी एकरेखीय नही होता. तो वागभट्ट जी कहते हैं कि जो बर्तन एकरेखीय हैं उनका त्याग कीजिये. वो काम के नही हैं. इसलिए गिलास का पानी पीना अच्छा नही माना जाता. लौटे का पानी पीना अच्छा माना जाता है. इस पोस्ट में हम गिलास और लोटा के पानी पर चर्चा करेंगे और दोनों में अंतर बताएँगे.

फर्क सीधा सा ये है कि आपको तो सबको पता ही है कि पानी को जहाँ धारण किया जाए, उसमे वैसे ही गुण उसमें आते है. पानी के अपने कोई गुण नहीं हैं. जिसमें डाल दो उसी के गुण आ जाते हैं. दही में मिला दो तो छाछ बन गया, तो वो दही के गुण ले लेगा. दूध में मिलाया तो दूध का गुण.

लौटे में पानी अगर रखा तो बर्तन का गुण आयेगा. अब लौटा गोल है तो वो उसी का गुण धारण कर लेगा. और अगर थोडा भी गणित आप समझते हैं तो हर गोल चीज का सरफेस टेंशन कम रहता है. क्योंकि सरफेस एरिया कम होता है तो सरफेस टेंशन कम होगा. तो सरफेस टेंशन कम हैं तो हर उस चीज का सरफेस टेंशन कम होगा. और स्वास्थ्य की दष्टि से कम सरफेस टेंशन वाली चीज ही आपके लिए लाभदायक है.अगर ज्यादा सरफेस टेंशन वाली चीज आप पियेंगे तो बहुत तकलीफ देने वाला है. क्योंकि उसमें शरीर को तकलीफ देने वाला एक्स्ट्रा प्रेशर आता है.

गिलास और लोटा के पानी में अंतर

गिलास के पानी और लौटे के पानी में जमीं आसमान का अंतर है. इसी तरह कुंए का पानी, कुंआ गोल है इसलिए सबसे अच्छा है. आपने थोड़े समय पहले देखा होगा कि सभी साधू संत कुए का ही पानी पीते है. न मिले तो प्यास सहन कर जाते हैं, जहाँ मिलेगा वहीं पीयेंगे. वो कुंए का पानी इसीलिए पीते है क्यूंकि कुआ गोल है, और उसका सरफेस एरिया कम है. सरफेस टेंशन कम है. और साधू संत अपने साथ जो केतली की तरह पानी पीने के लिए रखते है वो भी लोटे की तरह ही आकार वाली होती है. जो नीचे चित्र में दिखाई गई है.

सरफेस टेंशन कम होने से पानी का एक गुण लम्बे समय तक जीवित रहता है. पानी का सबसे बड़ा गुण है सफाई करना. अब वो गुण कैसे काम करता है वो आपको बताते है. आपकी बड़ी आंत है और छोटी आंत है, आप जानते हैं कि उसमें मेम्ब्रेन है और कचरा उसी में जाके फंसता है. पेट की सफाई के लिए इसको बाहर लाना पड़ता है. ये तभी संभव है जब कम सरफेस टेंशन वाला पानी आप पी रहे हो. अगर ज्यादा सरफेस टेंशन वाला पानी है तो ये कचरा बाहर नही आएगा, मेम्ब्रेन में ही फंसा रह जाता है.

दुसरे तरीके से समझें, आप एक एक्सपेरिमेंट कीजिये. थोडा सा दूध ले और उसे चेहरे पे लगाइए, 5 मिनट बाद रुई से पोंछिये. तो वो रुई काली हो जाएगी. स्किन के अन्दर का कचरा और गन्दगी बाहर आ जाएगी. इसे दूध बाहर लेकर आया. अब आप पूछेंगे कि दूध कैसे बाहर लाया तो आप को बता दें कि दूध का सरफेस टेंशन सभी वस्तुओं से कम है. तो जैसे ही दूध चेहरे पर लगाया, दूध ने चेहरे के सरफेस टेंशन को कम कर दिया क्योंकि जब किसी वस्तु को दूसरी वस्तु के सम्पर्क में लाते है तो वो दूसरी वस्तु के गुण ले लेता है.

इस एक्सपेरिमेंट में दूध ने स्किन का सरफेस टेंशन कम किया और त्वचा थोड़ी सी खुल गयी. और त्वचा खुली तो अंदर का कचरा बाहर निकल गया. यही क्रिया लोटे का पानी पेट में करता है. आपने पेट में पानी डाला तो बड़ी आंत और छोटी आंत का सरफेस टेंशन कम हुआ और वो खुल गयी और खुली तो सारा कचरा उसमें से बाहर आ गया. जिससे आपकी आंत बिल्कुल साफ़ हो गई. अब इसके विपरीत अगर आप गिलास का हाई सरफेस टेंशन का पानी पीयेंगे तो आंते सिकुडेंगी क्यूंकि तनाव बढेगा. तनाव बढते समय चीज सिकुड़ती है और तनाव कम होते समय चीज खुलती है. अब तनाव बढेगा तो सारा कचरा अंदर जमा हो जायेगा और वो ही कचरा भगन्दर, बवासीर, मुल्व्याद जैसी सेंकडो पेट की बीमारियाँ उत्पन्न करेगा.

इसलिए कम सरफेस टेंशन वाला ही पानी पीना चाहिए. इसलिए लौटे का पानी पीना सबसे अच्छा माना जाता है, गोल कुए का पानी है तो बहुत अच्छा है. गोल तालाब का पानी, पोखर अगर खोल हो तो उसका पानी बहुत अच्छा. नदियों के पानी से कुंए का पानी अधिक अच्छा होता है. क्योंकि नदी में गोल कुछ भी नही है वो सिर्फ लम्बी है, उसमे पानी का फ्लो होता रहता है. नदी का पानी हाई सरफेस टेंशन वाला होता है और नदी से भी ज्यादा ख़राब पानी समुन्द्र का होता है उसका सरफेस टेंशन सबसे अधिक होता है.

अगर प्रकृति में देखेंगे तो बारिश का पानी गोल होकर धरती पर आता है. मतलब सभी बूंदे गोल होती है क्यूंकि उसका सरफेस टेंशन बहुत कम होता है. तो गिलास की बजाय पानी लौटे में पीयें. तो लौटे ही घर में लायें. गिलास का प्रयोग बंद कर दें. जब से आपने लोटे को छोड़ा है तब से भारत में लौटे बनाने वाले कारीगरों की रोजी रोटी ख़त्म हो गयी. गाँव गाँव में कसेरे कम हो गये, वो पीतल और कांसे के लौटे बनाते थे. सब इस गिलास के चक्कर में भूखे मर गये. तो वागभट्ट जी की बात मानिये और लौटे वापिस लाइए.

सब लिख पाना असंभव है ये विडियो देखें >>

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10 गुणा लाभ देने वाली इस तकनिकी का जवाब नही, हर गाँव तक पहुचनी चाहिए

10 गुणा लाभ देने वाली इस तकनिकी का जवाब नही, हर गाँव तक पहुचनी चाहिए

मध्य प्रदेश के धार जिले के एक किसान रवि पटेल ने प्याज स्टोरेज की एक देसी कारगर तकनीक बनाई है। इसे अपनाकर वे दो साल से प्याज को खेत से निकालते ही 2 से 3 रुपए किलो के भाव पर बेचने के बजाय बारिश बाद 30 से 35 रुपए किलाे में बेच कर लाभ कमा रहे हैं। तीसरे साल भी उन्होंने प्याज का इसी तकनीक से स्टोरेज किया है।

इस किसान ने देसी टेक्नोलॉजी से बनाया कोल्ड स्टोरेज, ऐसे करता है काम >>

कैसे काम करती है रवि की ये टेक्नोलॉजी…

– रवि बंद कमरे में लोहे की जाली को जमीन से 8 इंच ऊंचा बिछाते हैं। ऐसा करने के लिए कुछ-कुछ दूरी पर दो-दो ईंटें रखते हैं। उसके ऊपर प्याज का स्टोरेज करते हैं।

– लगभग 100 स्क्वेयर फीट की दूरी पर एक बिना पैंदे की कोठी रखते हैं। ड्रम के ऊपरी हिस्से में एक्जॉस्ट पंखे लगा देते हैं।

– पंखे की हवा जाली के नीचे से प्याजों के निचले हिस्से से उठ कर ऊपर तक आती है। इससे पूरे प्याजों में ठंडक रहती है।

– दोपहर में हवा गर्म होती है, इसलिए दिन की बजाय रातभर पंखे चलाते हैं।

– पटेल ने इस तकनीक से 1000 क्विंटल प्याज का भंडारण किया है। 2000 क्विंटल और खेतों में हैं, जो इसी तरह भंडारण करने वाले हैं। पिछले साल उन्होंने बारिश बाद 200 क्विंटल प्याज 35 रु. किलो के भाव बेचे थे।

– पटेल ने बताया इस तकनीक से 80 प्रतिशत तक सड़न नियंत्रित होती है। पहले जहां 10 प्याज खराब होते थे, तो अब 2 होते हैं।

– वजह यह है कि किसी प्याज में सड़न लगती थी, तो आसपास के प्याज खराब कर देता था। अब कोई प्याज सड़ता है तो पंखे की हवा से वहीं सूख जाता है।

क्या कहते हैं रवि पटेल

पटेल बताते हैं प्याज की फसल अमूमन मार्च-अप्रैल में निकलती है। इस समय आवक अधिक होने से प्याज का मंडी भाव 2 से 3 रु. किलाे तक पहुंच जाता है। बारिश के बाद यही भाव 30 से 35 रु. किलो न्यूनतम होता है लेकिन प्याज गर्मी से जल्दी खराब होने के कारण इसका स्टोरेज किसान के लिए चुनौती होता है। किसान जहां भंडारण करते हैं, वहां पंखे-कूलर की व्यवस्था करते हैं लेकिन ढेर में प्याज एक-दूसरे की गर्मी से ही खराब हो जाते हैं। इसलिए मैंने ऐसी तकनीक लगाई है कि हर प्याज को जमीन से ही ठंडक मिले। कोई प्याज खराब भी हो तो ढेर में मौजूद आसपास के प्याज खराब नहीं हो।

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मच्छर काटना तो दूर आपके पास भी नहीं आ पाएंगे, मात्र 1 मिनिट में मच्छर भगाये

मच्छर काटना तो दूर आपके पास भी नहीं आ पाएंगे, मात्र 1 मिनिट में मच्छर भगाये

गर्मियों का मौसम आते ही सबसे बड़ी समस्या जो सामने आती है वह है मच्छरों की समस्या। गर्मियों में मच्छर इतने ज्यादा होते हैं कि वह हमें बहुत परेशान करते हैं। मच्छरों के कारण गर्मियों के मौसम में डेंगू नामक घातक बीमारी होती है। बहुत सारे लोग मच्छरों को मारने के लिए बाजार में आने वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन उनका भी कोई असर नहीं होता है इसलिए आज हम आपको मच्छरों को मारने के लिए एक ऐसा उपाय बताएंगे जिससे आपको मच्छरों से पूर्ण रुप से सुरक्षा मिल जाएगी।

हमारे देश में बहुत सारी औषधियां ऐसी हैं जिनका इस्तेमाल कर हम किसी भी तरह की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आज हम आपको एक ऐसे पत्ते के बारे में बताएंगे जिसका इस्तेमाल कर आप अपने कमरे के सारे मच्छरों को खत्म कर सकते हैं । जिस पत्ते की हम बात कर रहे हैं उसे तेजपत्ता के नाम से जाना जाता है ।

तेजपत्ता मधुमेह, अल्ज़ाइमर्स, बांझपन, खांसी जुकाम , जोड़ो का दर्द, रक्तपित्त, रक्तस्त्राव, दाँतो की सफाई, सर्दी जैसे अनेक रोगो में उपयोगी है। ये हमेशा हरा रहने वाले पेड़ तमाल वृक्ष के पत्ते हैं इसको तमालपत्र, तेज पात या तेजपत्ता कहते हैं। तेजपात मसाले के रूप में बहुतायत में काम लेते हैं।

यह सिक्किम, हिमालय, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में पैदा होते हैं। तेजपात पेड़ से पत्ते तोड़कर धुप में सुखाकर पंसारी की दुकानो पर बेचे जाते हैं। तेजपत्ता में दर्दनाशक, एंटी ऑक्सीडेंट गुण हैं। तेजपत्ता मधुर, कुछ तीक्षण, उष्ण, चिकना, तैलीय होता हैं। वात, कफ नाशक और पाचक होता हैं। आयुर्वेद में अनेक गंभीर रोगो में इसके उपयोग किये जाते हैं। आइये जाने।

इस पत्ते को जलाने से दोबारा कभी भी मार्टिन जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, तेजपत्ता हमारे देश में लगभग हर घर में मिल जाता है । कमरे के मच्छरों को मारने के लिए सबसे पहले चार तेजपत्ता लें, इन्हें घर के चार कोनों में जलाकर छोड़ दें और 15 मिनट के लिए कमरे के सभी दरवाजे और खिड़कियां बंद कर दें । 15 मिनट के बाद जब आप कमरे में जाएंगे तो आप देखेंगे कि कमरे के सभी मच्छर मर कर कर नीचे गिरे हुए हैं । इन पत्तों को जलाने को जलाने से जो धुआं निकलता है वह मच्छरों के लिए बहुत घातक होता है इसलिए इससे सारे मच्छर मर जाते हैं । इस पत्ते को जलाने के बाद आपके कमरे में दोबारा मच्छर नहीं आएंगे

सोने से पहले कमरे में जलाएं केवल 1 तेज पत्ता, सिर्फ़ 15 मिनट में आपको जो फ़ायदा होगा जिसकी आपने कभी कल्पना नही की होगी

रात को अच्छी नींद सोना है तो ज़रूरी है आपको किसी तरह का कोई तनाव न हो। आपका मन शांत हो। आप सुकून महसूस करें। लेकिन अमूमन ये हो नहीं पाता। दिनभर चाहे आप दफ्तर में रहें, कॉलेज जाएं या घर के कामों में उलझे रहें… तनाव हो ही जाता है। तनाव यानी स्ट्रेस। ये तनाव आपको रात को सोने नहीं देता। ये आपको मानसिक और शारीरिक तरीके से नुकसान पहुंचाता है। अगर आप छोटी सी कोशिश करें तो तनाव को मिनटों में दूर कर सकते हैं।

इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं बस एक तेज़ पत्ता चाहिए। तेज़ पत्ता हर किसी की किचन में बड़े ही आराम से मिल जाता है। ये सिर्फ 5 मिनट में आपके तनाव को दूर करने की क्षमता रखता है। एक रशियन साइंटिस्ट ने इस पर स्टडी की और पाया कि यह हमारे तनाव को दूर कर सकता है। यही वजह है कि तेज पत्‍ते को अरोमाथैरेपी के लिये इस्‍तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, तेज़ पत्ता यह त्‍वचा की बीमारियों और सांस से संबन्‍धित समस्‍याओं को भी ठीक करने के लिये जाना जाता है।

कैसे करें इस्तेमाल

एक तेज पत्ता लें और उसे किसी कटोरी या एैशट्रे में जला लें। अब इसे कमरे के अंदर लाकर 15 मिनट के लिए रख देंगे। आप पाएंगे कि तेज पत्‍ते की खुशबू पूरे कमरे में भर जाएगी। साथ ही आपको कमरे का माहौल काफी सुकून वाला लगेगा। ये आपको स्पा एक्सपीरियेंस देगा। कुछ देर इस कमरे में रिलेक्स होकर बैठ जाएं, आपको अपने अंदर सुकून बहता हुआ महसूस होगा और आपका तनाव कम होने लगेगा।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

सर्दी-जुकाम : चाय पत्ती की जगह (स्थान) तेजपात के चूर्ण की चाय पीने से छीकें आना, नाक बहना, जलन, सिर दर्द दूर होता है। तेजपात की छाल 5 ग्राम और छोटी पिप्पली 5 ग्राम को पीसकर 2 चम्मच शहद के साथ चटाने से खांसी और जुकाम नष्ट होता है। 1 से 4 ग्राम तेजपत्ता के चूर्ण को सुबह और शाम गुड़ के साथ खाने से धीरे-धीरे जुकाम ठीक हो जाता है।

सिर की जुंए : तेजपात के 5 से 6 पत्तों को 1 गिलास पानी में इतना उबालें कि पानी आधा रह जाये और इस पानी से प्रतिदिन सिर में मालिश करने के बाद स्नान करना चाहिए। इससे सिर की जुंए मरकर निकल जाती हैं।

आंखों के रोग : तेजपत्ते को पीसकर आंख में लगाने से आंख का जाला और धुंध मिट जाती है। आंख में होने वाला नाखूना रोग भी इसके प्रयोग से कट जाता है।

रक्तस्राव (खून का बहना) : नाक, मुंह, मल व मूत्र किसी भी अंग से रक्त (खून) निकलने पर ठंडा पानी 1 गिलास में 1 चम्मच पिसा हुआ तेजपात मिलाकर हर 3 घंटे के बाद से सेवन करने से खून का बहना बंद हो जाता है।

दमा (श्वास) : तेजपात और पीपल को 2-2 ग्राम की मात्रा में अदरक के मुरब्बे की चाशनी में छिड़ककर चटाने से दमा और श्वासनली के रोग ठीक हो जाते हैं। सूखे तेजपात का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में 1 कप गरम दूध के साथ सुबह-शाम को प्रतिदिन खाने से श्वास और दमा रोग में लाभ मिलता है।

खांसी : लगभग 1 चम्मच तेजपात का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से खांसी ठीक हो जाती है।
तेजपात की छाल और पीपल को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर उसमें 3 ग्राम शहद मिलाकर चाटने से खांसी में आराम मिलता है। तेजपात (तेजपत्ता) का चूर्ण 1 से 4 ग्राम की मात्रा सुबह-शाम शहद और अदरक के रस के साथ सेवन करने से खांसी ठीक हो जाती है

तेजपात (तेजपत्ता) की छाल का काढ़ा सुबह तथा शाम के समय में पीने से खांसी और अफारा दूर हो जाता है। 60 ग्राम बिना बीज का मुनक्का, 60 ग्राम तेजपात, 5 ग्राम पीपल का चूर्ण, 30 ग्राम कागजी बादाम या 5 ग्राम छोटी इलायची को एकसाथ पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इसके बाद इस चूर्ण को गुड़ में मिला दें। इसमें से चुटकी भर की मात्रा लेकर दूध के सेवन करने से खांसी आना बंद हो जाता है।

अफारा (पेट फूलना) : तेजपत्ते का काढ़ा पीने से पसीना आता है और आंतों की खराबी दूर होती है जिसके फलस्वरूप पेट का फूलना तथा दस्त लगना आदि में लाभ मिलता है। तेजपात का चूर्ण 1 से 4 ग्राम की मात्रा सुबह और शाम पीने से पेट में गैस बनने की शिकायत दूर होती है।

पीलिया और पथरी : प्रतिदिन पांच से छ: तेजपत्ते चबाने से पीलिया और पथरी नष्ट हो जाती है।

गर्भाशय का ढीलापन : गर्भाशय की शिथिलता (ढीलापन) को दूर करने के लिए तेजपात का प्रयोग करना चाहिए। तेजपात का चूर्ण 1 से 4 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से शिथिलता (ढीलापन) दूर हो जाती है। यदि गर्भाशय के शिथिलता (ढीलापन) के कारण गर्भपात हो रहा हो तो यह शिकायत भी इसके प्रयोग से दूर हो जाती है।

संधिवात (जोड़ों के दर्द) : तेजपत्ते को जोड़ों पर लेप करने से संधिवात ठीक हो जाता है।

स्तनों को बढ़ाने के लिए : तेजपात का चूर्ण सुबह तथा शाम सेवन करने से स्तनों के आकार में वृद्धि होती है। तेजपात का तेल किसी अन्य तेल में मिलाकर उससे स्तनों की मालिश सुबह तथा शाम को करने से स्तन के आकार में वृद्धि होती है।

सिर का दर्द : लगभग 10 ग्राम तेजपात को पानी में पीसकर माथे पर लेप करने से ठण्ड या गर्मी के कारण होने वाला सिर दर्द में आराम मिलता है। तेजपात की शाखा का छिलका निकालकर उसको पीसकर कुछ गर्म कर लें और इसे माथे के आगे के भाग में लेप की तरह लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।

बांझपन : बांझपन तथा गर्भपात की समस्या से पीड़ित स्त्री को तेजपात का चूर्ण चौथाई चम्मच की मात्रा में 3 बार पानी के साथ प्रतिदिन सेवन कराएं। इससे कुछ महीने गर्भाशय की शिथिलता दूर होकर बांझपन तथा गर्भपात की समस्या दूर हो जाती है।

निमोनिया : तेजपात, नागकेसर, बड़ी इलायची, कपूर, अगर, शीतल चीनी तथा लौंग सभी को मिलाकर तथा काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से लाभ मिलता है।

हकलाना, तुतलाना : रुक-रुक कर बोलने वाले या हकलाने वाले व्यक्ति को तेजपात जीभ के नीचे रखकर चूसना चाहिए इससे हकलाना तथा तुतलाना दूर होता है।

कमर का दर्द : 10 ग्राम अजवायन, 5 ग्राम सौंफ तथा 10 ग्राम तेजपात इन सब को कूट-पीसकर 1 लीटर पानी में उबालें। जब यह 100 ग्राम रह जाए तब इसे ठंडा करके पीएं इससे शीत लहर के कारण उत्पन्न कमर का दर्द ठीक हो जाता है।

मोच : तेजपात और लौंग को एक साथ पीसकर बना लेप बना लें। इस लेप को मोच वाले स्थान पर लगाएं इससे धीर-धीरे सूजन दूर हो जाती है और मोच ठीक हो जाता है।

मधुमेह (शूगर) का रोग : तेजपात के पत्तों का चूर्ण 1-1 चुटकी सुबह, दोपहर तथा शाम को ताजे पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह रोग ठीक हो जाता है।

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बिना घी की रोटी खाने वालों आपको मुर्ख बनाया गया है, जानिए सच्चाई क्या है

बिना घी की रोटी खाने वालों आपको मुर्ख बनाया गया है, जानिए सच्चाई क्या है

दोस्तों, हर घर से एक आवाज जरुर आती है, “मेरे लिए बिना घी की रोटी लाना”, आपके घर से भी आती होगी, लेकिन घी को मना करना सीधा सेहत को मना करना है. पहले के जमाने में लोग रोजमर्रा के खानों में घी का इस्तेमाल करते थे. घी का मतलब देसी गाय का शुद्द देशी घी. घी को अच्छा माना जाता था. और कोलेस्ट्रोल और हार्ट अटैक जैसी बीमारियाँ कभी सुनने में भी नही आती थी.

लेकिन फिर शुरू हुई घी की गलत पब्लिसिटी, बड़ी बड़ी विदेशी कंपनियों ने डॉक्टरों के साथ मिलकर अपने बेकार और यूजलेस प्रोडक्ट को सेल करने के लिए लोगों में घी के प्रति नेगेटिव पब्लिसिटी शुरू की. और ये कहा कि घी से मोटापा मोटापा आता है, कोलेस्ट्रोल बढता है, और हार्ट अटैक आने की सम्भावना बढती है. जबकि ये सरासर गलत है. जबकि रिफाइंड और दुसरे वनस्पति तेल और घी इन सब रोगों का कारण है. जब लोग बीमार होंगे तो ही डॉक्टरों का धंधा चलेगा.. इसी सोच के साथ इन विदेशी लुटेरी कंपनियों के साथ ये डॉक्टर भी मिल गए. अब इस मार्किट में कुछ स्वदेशी कंपनियां भी आ गई है. और धीरे धीरे लोगों के दिमाग में यह बात घर कर गई कि घी खाना बहुत ही नुकसानदायक है. घी न खाने में प्राउड फील करने लगे कि वो हेल्थ कांसियंस है. क्योकि जब आप एक ही चीज झूठ को बार बार टीवी पर दिखाओगे तो वो लोगो को सच लगने लगता है.

जबकि घी खाना नुकसानदायक नही बहुत ही फायदेमंद है. घी हजारों गुणों से भरपूर है, खासकर गाय का घी तो खुद में ही अमृत है. घी हमारे शरीर में कोलेस्ट्रोल को बढाता नही बल्कि कम करता है. घी मोटापे को बढाता नही बल्कि शरीर के ख़राब फैट को कम करता है. घी एंटीवायरल है और शरीर में होने वाले किसी भी इन्फेक्शन को आने से रोकता है. घी का नियमित सेवन ब्रेन टोनिक का काम करता है. खासकर बढ़ते बच्चों की फिजिकल और मेंटली ग्रोथ के लिए ये बहुत ही जरुरी है.

ये जो उठते और बैठते आपके शरीर की हड्डियों से चर मर की आवाज आती है इसकी वजह आपकी हड्डियों में लुब्रिकेंट की कमी है, अगर आप घी का नियमित सेवन करते है. तो ये आपकी मसल्स को मजबूत करता है और आपकी हड्डियों को नृश करता है.

घी हमारे इम्यून सिस्टम को बढाता है. और बिमारियों से लड़ने में आपकी मदद करता है. घी हमारे डाइजेस्टीव सिस्टम को भी ठीक रखता है जो आजकल सबसे बड़ी प्रॉब्लम है. आज हर दूसरा व्यक्ति कब्ज का मरीज है. दिन में कई कई बार शोचालय जाता है

अब हम बात करते है कि घी को कितना और कैसे खाए

एक नार्मल इन्सान के लिए 4 चम्मच घी काफी है. घी को पका कर या बिना पकाए दोनों तरीके से खा सकते है. चाहे तो इसमें खाना पका लें या फिर बाद में खाने के ऊपर डालकर खा लें. दोनों ही तरीके से घी बहुत ही फायदेमंद है.

और सबसे जरुरी बात अगर आप सबसे ग्लोइंग, शाइनिंग और यंग दिखना चाहते हैं तो घी जरुर खाएं क्योंकि घी एंटीओक्सिडेंट जोकि आपकी स्किन को हमेशा चमकदार और सॉफ्ट रखता है. आपके अपने और आसपास के सभी लोगों की अच्छी सेहत के लिए यह जानकारी उनके साथ साँझा करे. और जो बिना घी की रोटी खाते है उनको ये पोस्ट जरुर भेजे.

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